Entrepreneurship Development in hindi-एन्त्रेप्रेंयूर्शिप डेवलपमेंट क्या है?

हेल्लो दोस्तों आज के इस पोस्ट में आपको entrepreneurship development in hindi  के बारे में बताया गया है की क्या होता है कैसे काम करता है तो चलिए शुरू करते है

Entrepreneurship Development(उघमीता विकास)

एक पुरानी कहावत है की “ उघमी जन्मजात होते है बनाये नहीं जाते “ यह कहावत आज के युग में सार्थक को सिद्ध नहीं होती यह सिद्ध हो चूका है की एक व्यक्ति में सुनियोजित उघमिता विकास कार्यक्रमों के द्वारा उघमिता के लक्षम विकसित किये जा सकते है ये कार्यक्रम अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम होते है और इनकी अवधि एक सप्ताह से 3 माह तक होती है

इस प्रकार के उघमिता को विकास के कार्यक्रमों का सबसे बड़ा लाभ यह होता है की इसे देश में सामाजिक जागरूकता का माहौल बनता है यह एक चरणबध्द योजना के तहत युवाओ को रोजगार के नये अवसर और एक नयी सोच उपलब्ध कराता है

वे परिवार में पारम्परिक रूप से औघोगिक पृष्ठभूमि से नहीं है उनकी मनोवृति को बदलता है और स्वयं का उघोम लगाकर न केवल वे अपनी लिए आजीविका का साधन बनाते है बल्कि औरो के लिए भी रोगगार /नौकरी के अवसर उपलब्ध कराते है

उघमिता विकास कार्यक्रम के मूल उद्देश्य (basic objectives of entrepreneurial development )

  • उघमिक गुणवत्ता/ प्रोत्साहन को विकसित करना तथा मजबूती प्रदान करना
  • लघु उद्योगों तथा लघु व्यापारियों से संबंधित वातावरण को विश्लेषित करना
  • प्रोजेक्ट अथवा उत्पाद का चयन करना
  • प्रोजेक्ट की व्यवस्था बनाना
  • एक उपक्रम की शुरुआत करने के लिए आवश्यक सहारा देने वाले संस्थाओं/व्यक्तियों की पहचान करना
  • स्कूल अथवा कॉलेज से निकलने वाले शिक्षित तथा अल्प शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना
  • प्रबंधन के मूल गुण एवं कौशल को अपनाना
  • इन कार्यक्रमों द्वारा रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होता है

उद्यमिता विकास का लक्ष्य(task of developing entrepreneurship)

उद्यमी बनाने का लक्ष्य प्राप्त आसान कार्य नहीं है इस लक्ष्य की प्राप्ति हो तो चलाए जा रहे उद्यमिता विकास कार्यक्रमों को उघमिता  को प्रोत्साहित करने वाली वर्तमान सरकारी नीतियों की जानकारी होनी चाहिए यह आवश्यक है कि उघमिता  प्रोत्साहित करने वाला वातावरण बने तथा इसके लिए विभिन्न संस्थाओ  से वांछित सहयोग भी प्राप्त हो उघमिता विकास के लक्ष्य में निहित है –

  1. उन व्यक्तियों को पहचानना एवं सावधानीपूर्वक चयन करना जो एक उद्यमी के रूप में विकसित किए जा सकते हैं
  2. उनकी उघमिक क्षमताओं को विकास करना
  3. यह सुनिश्चित करना कि वे उपयुक्त औघोगिक प्रोजेक्ट का चयन करें
  4. उनमें मूल प्रशासनिक , वित्तीय एवं प्रबंधकीय  की क्षमताओं को विकसित करना
  5. वित्त तथा अन्य आवश्यक संरचनात्मक सहायता प्राप्त करने में मदद करना

भविष्य की निम्न संभावनाओं को ध्यान में रखकर थी संपूर्ण प्रशिक्षण के साथ ही किसी उपक्रम के स्थापना हेतु भविष्य के उद्यमी तैयार किए जाने चाहिए

  1. आधुनिकीकरण के अवसर एवं तकनीक
  2. ISO-9000 की आवश्यकताओ सहित गुणवत्त
  3. ग्राहक की संतुष्टि /सेवा
  4. उर्जा संरक्षण
  5. प्रदुषण एवं अन्य पर्यावरण के विचार
  6. उत्पादन की लागत
  7. राष्ट्रिय तथा अन्तराष्ट्रीय level पर प्रतिस्पर्धा

उघमिता विकास कार्यक्रम को उपरोक्त विचारो को दृष्टिगत रखते हुए तैयार किया जाना चाहिए की प्रतिस्पर्धात्मक विकास केन्द्रित तथा गुणवत्ता के प्रति उघमी को बढ़ावा देना तथा की उत्साहित करना आज के समय को सबसे बड़ी आवश्यकता है उनकी सोच को विश्वस्तरीय तथा कार्य दक्षतापूर्व होना अत्यंत आवश्यक होता है

उघमिता को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारक (factors promoting entrepreneurship)

उपरोक्त सामाजिक राजनैतिक तथा आर्थिक वातावरण देकर निम्म कारक उघमिता को बढ़ावा देते है

  1. संस्थागत स्त्रोतों से वित्तीय सहायता
  2. औघोगिक आस्थानो में स्थान
  3. समान अथवा सम्बंधित व्यापारा का अनुभव
  4. जीवन में कुछ नया एवं स्वतंत्र करने की कोशिश करना
  5. तकनिकी ज्ञान एवं विनिर्मित का अनुभव
  6. विभिन्न उत्पादों की भारी मांग
  7. विदेशी अथवा भारतीय सह्कार्यता
  8. किराए पर मशीन की उपलब्घता
  9. नये उघोग लगाने के लिए सरकार से मिलने वाला सहयोग
  10. बढ़ते हुए आयात पर प्रतिबन्ध लगाकर उघोगो को सुरक्षा प्रदान करना
  11. पहले से स्थापित बड़े उघोगो के द्वारा दिया गया प्रोत्साहन
  12. सरकारी एवं गैर सरकारी स्त्रातो से वित्त की उपलब्धता
  13. पर्याप्त लाभांश
  14. उघमिक गतिविधियों में परिवार एवं सामाजिक सहयोग एवं उत्साहवर्धन
  15. स्वदेशी कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता
  16. आर्थिक गतिविधियों के उद्धेश्य से राजनैतिक प्रभाव

उघमिता के विकास के लिए सामाजिक ,राजनैतिक एवं आर्थिक परिवेश का अध्ययन करना अत्यंत आवश्तक होता है राजनैतिक माहौल ,औघोगिक नीतिया ,तकनिकी विकास एवं सामाजिक परिवर्तन को मिलकर एक ऐसे structure को तैयार करते है जिसमे किसी उघमी को कार्य करना होता है इस प्रकार व्यावसायिक वातावरण का उघमिता विकास के साथ ही सम्बन्ध होता है

entrepreneurship development in hindi

reference-https://byjus.com/commerce/entrepreneurship-development-process/

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