पेशेवर के गुण/लक्षण-Characteristics of a Professional in hindi

 हेल्लो दोस्तों ! आज इस पोस्ट में जावा Characteristics of a Professional in hindi क्या होता है यह किस लैंग्वेज से बना होता है इसके फीचर क्या क्या होते है आज इस पोस्ट में बताया जायेगा  तो चलिए imed को समझते है

पेशेवर के गुण/लक्षण (Characteristics of a Professional)

एक पेशेवर व्यक्ति में निम्न गुण होने चाहिए

(i) वह ईमानदार होना चाहिए।

(ii) वह सत्यनिष्ठ होना चाहिए। उसकी सत्यनिष्ठा पर आँच नहीं आना चाहिए।

(iii) उसके निर्णयों में पारदर्शिता (Transparency) दिखनी चाहिए।

(iv) पेशेवर व्यक्ति को उसके लिए गये निर्णयों के लिए उत्तरदायी होना चाहिए।

 (v) गोपनीयता (Confidentiality) बनाये रखने का गुण होना चाहिए। किसी एक कम्पनी/व्यक्ति से सम्बन्धित गोर बातें किसी अन्य व्यक्ति/कम्पनी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए।

 (vi) पेशेवर व्यक्ति को सदैव निष्पक्ष रहना चाहिए। इससे सभी व्यक्तियों का उस पर विश्वास बनता है।

 (vii) उसे सभी प्रकार के व्यक्तियों को, बिना धर्म जाति, उँच-नीच, अमीर-गरीब आदि का भेदभाव किये, आटा चाहिए।

(viii) पेशेवर व्यक्ति को सदैव कानून का पालनकर्ता होना चाहिए। उसे कानून का आदर करने वाला तथा उसी के अनुरूप कार्य करने वाला होना चाहिए।

(ix) वफादार (Loyal) होना चाहिए। अपने पेशे के विरुद्ध किसी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहिए।

 क्रियान्वयन करना (Implementation)

ज्यादातर पेशेवर लोग आन्तरिक रूप से व्यवहार के कुछ कोड बना लेते हैं जिसका पालन उस पेशे से सम्बन्धित अन्य सदस्यों को करना पड़ता है। इससे उनका अपने ग्राहकों (Client) के शोषण (Exploitation) से भी बचाव हो जाता है और व्यवसाय की निष्ठा (Integrity) भी बनी रहती है। यह न केवल ग्राहक (Client) के लिए हितकारी होता है

बल्कि व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए भी हितकारी होता है। अनुशासन सम्बन्धी कोडों (Disciplinary Codes) से व्यवसाय को आचरण के मानकों (Standard of Conduct) को परिभाषित करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही ऐसे पेशेवर लोग. जो इन काड का सही से पालन नहीं करते हैं, उन्हें भी इसका पालन करने के लिए प्रेरित तथा बाध्य करती है। इससे आम जनता का विश्वास भी व्यवसाय/पेशे के साथ जुड़ता है और उन्हें उन पेशेवर लोगों की सेवाएं लेने तथा उन्हें बनाये रखने के लिए प्रेरित करता है।

आन्तरिक नियन्त्रण (Internal Regulation)

ऐसी परिस्थितियों, जहाँ पेशेवर लोग अपने आप अपने लिए नैतिकता के नियम निर्धारित करते हैं. में यह सम्भाव बनी रहती है कि वे अपने द्वारा ही बनाये गये नैतिक नियमों में अपने लिए शिथिलता ले लें और अपने विश्वासघाता का बचाव करें। यह परिस्थितियाँ विशेषता वहाँ उत्पन्न होती है जहाँ ज्ञान के एक विशेष क्षेत्र पर उनका पूर्ण  अधिकार हो

संवैधानिक नियन्त्रण (Statutory Regulation)

बहुत से देशों में पेशेवर नैतिक मानकों पर संवैधानिक नियन्त्रण होता है जैसे कि इग्लैंड तथा वेल्स (Wales) क संस्थाएं, जो नर्सिंग तथा प्रसूतिविधा (Midwifery) पेशे पर नियन्त्रण रखती है। इन मानकों का सही से अनुपालन पर यह मामला अदालत तक जा सकता है।

उदाहरण-यदि सड़क पर हुई किसी दुर्घटना के कारण कोई व्यक्ति घायल हो आदमी उसकी जिंदगी को बचाने के लिए उत्तरदायी नहीं होता है। क्योंकि वह घायल व्यक्ति को उचित उपचार नहीं दे सकता है यद्यपि वह उसकी मदद करने और चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाने के लिए उत्तरदायी हो सकता है। यह इसलिए होता है क्योंकि एक आम आदमी को एक प्रशिक्षित डाक्टर की तुलना में न तो ज्ञान होता है और न ही अनुभव होता है।

एक प्रशिक्षित डाक्टर, जिसके पास समस्त उपकरण तथा दवा आदि होते हैं, समस्या को तुरन्त पहचानता (diagnosis) है और उसके अनुरूप ही इलाज की विधि को अपनाता है। ऐसी किसी परिस्थिति में किसी डॉक्टर का मदद न करना ही अनैतिक (unethical) तथा लापरवाही (negligence) कहलाता है।

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यदि एक डाक्टर मदद करता है और ऐसी गलती करता है जो अनैतिक एवं लापरवाही पूर्ण हो, तब यह बेहद खराब प्रतिघात (egregious repercussions) करता है। यदि कोई प्रशिक्षित व्यक्ति, मदद करने के प्रयास में कोई ऐसी विधि अपनाता है जो वह जानता नहीं तो इसे लापरवाही माना जाता है और अगर अन्जाने में घायल व्यक्ति को कुछ अधिक नुकसान हो जाये या फिर उसकी मृत्यु हो जाये तो भी उसे “गुड़ समारितन लॉ’ (Good Samaritan Law) के तहत् सुरक्षा मिलती है।

कोई व्यवसाय एक पेशेवर इंजीनियर की सेवाओं को एक ऐसे प्रोजेक्ट की सुरक्षा को प्रभावित करने के लिए ले सकता है जो सुरक्षित नहीं है। एक इंजीनियर ऐसे प्रस्ताव को प्रमाणित करने से, नैतिक आधार पर, मना कर सकता है। ऐसे में व्यवसाय एक कम ईमानदार इंजीनियर को तलाशता है जो एक रिश्वत के बदले प्रोजेक्ट को प्रमाणित करने के लिए तैयार हो जाता है तथा व्यवसाय को पुन: अभिकल्पन (Redesigning) के खर्चे से बचाता है।

पृथकतावाद (Separatism)

– सैद्धान्तिक स्तर पर बहस का विषय हो सकता है कि क्या किसी व्यवसाय के लिए एक नैतिक कोड (Ethical Code), जो आम जनता के नैतिक संचालन के लिए आवश्यक है, स्थायी रहना चाहिए। पृथकतावादी (Separatists) यह तर्क दे सकते हैं कि पेशेवरों को ऐसी सीमाओं से बाहर जाने की अनुमति होनी चाहिए यदि वे ऐसा करना आवश्यक हो।

ऐसा इसलिए क्योंकि वे ऐसे निश्चित परिणाम देने के लिए प्रशिक्षित होते हैं जिन्हें वे समाज के अन्य कार्यों के ऊपर नैतिक वरीयता देते हैं। उदाहरण के लिए यह तर्क का विषय हो सकता है कि एक डॉक्टर अपने मरीज से उसकी बीमारी के सम्बन्ध में झूठ बोले क्योंकि इसके पीछे यह कारण यह कि मरीज को सच्चाई बता देने से वह दुखी होगा जो उसकी सेहत के लिए अत्यन्त हानिकारक हो सकता है।

इसको मरीज के अधिकारों की अवमानना भी माना जा सकता है क्योंकि इससे मरीज को उसकी सेहत के बारे में सही सूचना नहीं मिल पाती है। सामान्यतया नैतिक रूप से इसे गलत माना जा सकता है।

पृथकतावाद नैतिकता (morality) की इस सापेक्षवादी विचारधारा पर आधारित होता है कि विभिन्न समाजों में विभिन्न नैतिक कोड हो सकते हैं तथा समाज के विभिन्न वर्गों में समान रूप से मान्य (valid), दूसरे. नैतिक कोडों से अलग भी कोड हो सकते हैं। यदि नैतिक सार्वभौमवाद (Moral Universalism) को श्रेय दिया जाये तो यह इस दृष्टिकोण से भिन्न होगा कि विभिन्न पेशे अलग-अलग नैतिक कोड रख सकते हैं क्योंकि सार्वभौमवादी (Universalist) यह मानते हैं कि सभी के लिए केवल एक मान्य नैतिक कोड होता है।

छात्र नैतिकता (Student Ethics)

जब छात्र/छात्राएं हाई स्कूल अथवा इन्टरमीडिएट पास करके कालेज में ग्रेजुएशन (Graduation) के लिए प्रवेश करते हैं तो उनके जीवन का स्टैण्डर्ड (Standard) स्थापित हो जाता है। छात्रों की अपेक्षाओं पर कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों (Universities) का महत्वपूर्ण स्थान होता है क्योंकि वहाँ उन्हें व्यवसायिक माहौल एवं शिक्षा प्राप्त होती है। व्यवसायिक माहौल बनाने से छात्रों को आसानी से ऐसे माहौल में काम करने की आदत पड़ जाती है जिस माहौल में उन्हें भविष्य में काम करना होता है।

reference-https://www.indeed.com/career-advice/career-development/professional-characteristics

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